श्रीरंग वासुदेव पेंढारकर
आज शाम गत लगभग तीन महीनों से चल रहा चुनाव कार्यक्रम का समापन हो जाएगा। शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव आयोजन हेतु चुनाव आयोग और पूरा सरकारी तन्त्र बधाई का अधिकारी है। 97 करोड़ मतदाताओं के मतदान की व्यवस्था निश्चित ही विश्व को अनूठी घटना है।
इस चुनाव में कश्मीर घाटी में भारी संख्या में मतदान सबसे उल्लेखनीय घटना रही है। जिन क्षेत्रों में बमुश्किल 10 – 12% ही मतदान होता रहा हो वहां लगभग 60% मतदान होना मोदी सरकार की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक है। कश्मीर की समस्या चाहे हमारी आंतरिक समस्या रही हो, उस पर ध्यान शेष विश्व का भी रहता है। पाकिस्तान की कश्मीर नीति तो उसकी विदेश नीति का सबसे प्रमुख आयाम रहा है।
अनुच्छेद 370 का निष्प्रभावीकरण करना मोदी सरकार का अत्यन्त साहसिक निर्णय था। विगत कई दशकों से 370 ही कश्मीर की राजनीति का मूलाधार था। कांग्रेस और वहां के क्षेत्रीय दल इसी आधार पर राजनीति कर रहे थे। सोची समझी रणनीति के तहत इन दलों के शीर्ष नेतृत्व ने एक ओर तो भ्रष्टाचार के नए कीर्तिमान रचे और दूसरी ओर पूरी कश्मीर घाटी को आतंक, हिंसा और गरीबी के दुष्चक्र में धकेल रखा था। ये दल अनुच्छेद 370 का उपयोग एक ढाल की तरह करते थे और देश में होने वाले सामान्य या असामान्य परिवर्तनों से कश्मीर को अछूता रखते थे। न उन्होंने कश्मीर घाटी को शेष भारत के साथ जोड़ने के लिए आधारभूत संरचना का विकास किया, न निवेश को बढ़ावा दिया और न ही शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं का विकास किया। दूसरी ओर पाक समर्थित आतंकवाद को पनपने और विकसित होने का अवसर दिया और पूरी नौजवान जनसंख्या को पत्थरबाजी में शामिल होने की व्यवस्था को अनुकूल माहौल प्रदान किया।
अनुच्छेद 370 को लेकर खुलेआम पूरे देश को धमकाया जाता था। यदि 370 को हटा दिया गया तो कश्मीर में खून को नदिया बहेंगी ये बयान हम सब ने सुने हैं। यही शब्द पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान ने संयुक्तराष्ट्र के मंच से भी दोहराए थे।
भारी मतदान के साथ संपन्न हुए 2024 के चुनावों ने यह सिद्ध कर दिया है कि 370 का निष्प्रभावीकरण कश्मीर की मुस्लिम जनता को भी रास आया है। गत चार वर्षों में केंद्र सरकार ही वहां की सत्ता चला रही है। निश्चय ही सरकार ने वहां सकारात्मक और शांतिपूर्ण माहौल बनाया है। रोजगार के अवसर उत्पन्न किए हैं और मूलभूत सेवाएं सुलभ की है। जिस कश्मीर घाटी में रोज निरपराध लोगों को और सुरक्षा बलों के सैनिकों को मौत के घाट उतारा जा रहा था, बाजार और अन्य व्यापारिक गतिविधियां चलाना नामुमकिन हो चुका था और चारों और असुरक्षा, सन्देह और भय का माहौल था उस कश्मीर घाटी में लोगों को बड़ी तादाद में अपने प्रजातंत्रीय कर्तव्य का निर्वाह करते देखना बेहद सुखद रहा है। यह दृश्य समूचे विश्व के लिए एक संदेश है कि कश्मीर घाटी पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद से पूरी तरह मुक्त हो चुका है और यह भी कि कश्मीर के लोगों का हिंसा से जुड़ाव, स्वप्रेरणा से नहीं बल्कि बाहरी षड्यंत्रों और क्षुद्र आंतरिक राजनीति का परिणाम था।
निश्चय ही कश्मीर घाटी में नजर आ रहा जीवन का यह रूपांतरण प्रधानमंत्री मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और उनके सहकर्मियों की भव्य सफलता रहा है।

