श्रीरंग वासुदेव पेंढारकर
देश की आर्थिक स्थिति विश्व में सबसे अच्छी है। गरीबी तेजी से कम हो रही है और प्रतिव्यक्ति आय बढ़ रही है। विदेश नीति सतत भारत का वजन बढ़ा रही है। कोविड की वैक्सीन और हथियारों के निर्यात जैसे अभूतपूर्व कार्य हो रहे हैं। पूरे देश में नए मार्ग, नए पुल, नए रेल मार्ग, सुरंगे, नई रेल गाड़ियां, हवाई अड्डे, विद्युत उत्पादन संयंत्र, सौर ऊर्जा से विद्युत उत्पादन आदि के साथ आधारभूत संरचना के क्षेत्र में अतुलनीय कार्य हुआ है। गरीबों को भोजन मिल रहा है। सरकार लाखों करोड़ रुपया खर्च कर रही है, परन्तु भ्रष्टाचार के कोई आरोप नहीं लगे हैं।
आतंकी हमले समाप्त हो चुके हैं। पाकिस्तान पर नकेल कसी हुई है। चीन भी मनमानी नहीं कर पा रहा है। कश्मीर में दशकों से चल रही पत्थरबाजी और हिंसा थम चुकी है। 370 हटने के बाद खून की होली की बजाय विकास की दीवाली मन रही है। खालिस्तानी आंदोलन को पुनर्जीवित करने के प्रयास असफल सिद्ध हो रहे हैं। राम लला भव्य मन्दिर में प्रतिष्ठित हो चुके हैं।
जो कुछ मोदी सरकार ने गत दस वर्षों ने किया है, वह अविश्वसनीय है। आगे होनेवाले कार्यों के जो संकेत मिल रहे है, वह अवाक कर देने वाले हैं। जाहिर है, विपक्ष अपनी लकीर बड़ी दिखा ही नहीं पा रहा है। राफेल विमान सौदा, पेगासस, CAA, कृषि सुधार जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने के प्रयास हुए परन्तु हर बार उन्हें असफलता ही मिली। नेहरू इन्दिरा युग के बाद पहली बार देश ऐसे चुनाव की दहलीज पर है जहां चुनाव के पहले ही नतीजे तय नजर आ रहे हैं। ऐसी परम निराशा की स्थिति में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इलेक्टोरल बॉन्ड का मामले में की जा रही कार्यवाही और टिप्पणियां बिल्ली के भाग्य से छींका टूटने वाली स्थिति बना रही है।
2017 में एनडीए सरकार इलेक्टोरल बॉन्ड्स की योजना ले कर आई। यदि कोई कंपनी किसी राजनीतिक दल को चन्दा देना चाहती है, तो वह अपने बैंक एकाउंट से यानी कि घोषित निधि से बॉन्ड्स खरीद ले और राजनीतिक दल को सौंप दे। इन बॉन्ड्स पर यह दर्ज नहीं होता कि ये किसने खरीदे हैं। जो इन बॉन्ड्स को सिकारने के लिए प्रस्तुत करता है, उसके खाते में उनके मूल्य के बराबर धन क्रेडिट हो जाता है। यानी चंदा देने वाले के बैंक खाते से पैसा निकला और राजनीतिक दल के बैंक खाते में आ गया। दोनो पक्षों के खाते सार्वजनिक होते हैं। जो भी धन का लेन देन हो रहा है, सब पारदर्शी है और घोषित है। पर अब सर्वोच्च न्यायालय ने इस व्यवस्था पर रोक लगा दी है!
2017 के पूर्व राजनीतिक चन्दा सामान्यतः घोषित आय से नहीं होता था और यह लेन देन अपारदर्शी होता था। सर्वोच्च न्यायालय ने इलेक्टोरल बॉन्ड्स तो बन्द कर दिए परन्तु किसी अधिक पारदर्शी व्यवस्था की अनुशंसा नहीं की है। न्यायालय की जो भी मंशा रही हो, उनके निर्णय का एक प्रभाव यह भी होना संभावित है कि पुनः एक बार चुनावी चन्दा अपारदर्शी तरीके से दिया जाने लगे।
विपक्ष अत्यंत सुनियोजित तरीके से इस विषय को चुनाव का मुख्य मुद्दा बनाने में प्रयासरत है। सत्य यह है कि सभी दलों को इलेक्टोरल बॉन्ड्स से चन्दा मिला है। विपक्षी दलों को उनकी सीटों के अनुपात में भाजपा से कही अधिक ही चन्दा मिला है। लेकिन अब प्याज के छिलकों के माफिक इलेक्टोरल बॉन्ड्स के भ्रामक निष्कर्ष निकाले जा रहे हैं। तमाम वाममार्गी सार्व तंत्र (इको सिस्टम) इस विमर्श को आगे बढ़ा रहा है। जनता को हर स्तर पर भ्रमित करने की योजना को कार्यरूप दिया जा रहा है।
सत्ताधारी दल को कठघरे में खड़ा करना और उस पर राजनीतिक हमला करना निश्चय ही विपक्ष का प्रजातांत्रिक धर्म है। परन्तु ऐसा करने के लिए किसी ठोस मुद्दे के अभाव में अवास्तविक और भ्रामक मुद्दे खड़े करना अत्यंत दुखद है। सर्वोच्च न्यायालय का रवैया भी अक्सर समझ के परे होता है। राम मन्दिर मामले पर कपिल सिब्बल ने सरे आम यह मांग की थी कि फैसले का असर चुनाव के नतीजों पर हो सकता है इसलिए फैसला चुनाव के बाद सुनाया जाए। उनकी प्रार्थना स्वीकार कर ली गई थी। पर इलेक्टोरल बॉन्ड्स के मामले में यह रियायत देना उचित नहीं समझा गया। क्यों? अब माननीय से ‘क्यों’ पूछना संभव ही कहां है?
मुख्य न्यायाधीश की मंशा जो भी रही हो, चुनाव के ठीक पहले उनके इस निर्णय ने विपक्ष को एक ऐसा मुद्दा पकड़ा दिया है, जिसके बारे में भ्रम फैलाए जा सकते हैं और मंचों से बगैर सर पैर के आरोप मढ़े जा सकते हैं। सर्वोच्च न्यायालय स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को इस तरह से निर्देशित कर रहा है जैसे स्टेट बैंक कुछ बहुत बड़ा तथ्य छुपा रहा हो। सुनवाई के दौरान की न्यायमूर्तियों की प्रतिक्रियाएं, टिप्पणियां और निर्देश इस पूरे मामले को गैरजरूरी बढ़ावा दे रहे हैं और वह सनसनी पैदा कर रहे हैं जिसके लिए विपक्ष छटपटा रहा है। हालांकि, इस सब का भी चुनाव के अन्तिम नतीजे पर कोई बड़ा प्रभाव पड़ने की संभावना तो नजर नहीं आती, परन्तु गैर जरूरी नकारात्मकता बढ़ने की संभावना बढ़ सकती है।

