हमी माता(शंभू माता) नो मेलो

निलेश कटारा, झाबु

झाबुआ अंचल के भील वनवासी समाज के प्रमुख त्यौहारों में से एक त्यौहार है, हमी माता नो मेलो। यह मेला पांच दिवसीय होता हैं लेकिन मुख्य रूप से यह हनुमान जन्मोत्सव अर्थात् पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है।

शंभू माता आदिवासी समाज की कुल देवी हैं। यह स्थान थांदला से करीब 03 से 04 km दूर हैं। यहां प्रतिवर्ष मेला लगता है। मेले में सभी प्रकार की दैनिक उपयोगी सामग्री से लेकर बच्चों के खिलौनों तक समस्त प्रकार की उपयोगी वस्तुएं मिलती हैं। इस मेले में बड़ी मात्रा में मवेशी भी आते है। आदिवासी समाज इसी मेले से मवेशीयों की सबसे अधिक खरीदारी करते हैं। इस मेले में आदिवासियो के उपयोग के उपकरण और हथियार भी भारी मात्रा में मिलते हैं। पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह मेला, केवल मेला ही नहीं आदिवासियों की पुरातन प्रथाओं, संस्कृति एवं जीवन दर्शन पर आधारित है। प्रकृति में मौसम के अनुसार जो बदलाव होता है उसी के आधार पर वनवासी समाज के तीज त्यौहार मनाये जाते हैं।

वनवासी मूलत: प्रकृति पूजक रहे हैं । वे प्रकृति में ही ईश्वर को देखते हैं।शंभू माता का यह मंदिर सबसे प्राचीन देव स्थलों में से एक है। मान्यता है कि यहां पर आने वाले सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती है। प्रशासकीय स्टार पर यह मध्य प्रदेश की झाबुआ जिले की मेघनगर तहसील में स्थित है परंतु थांदला तहसील से मात्र तीन से चार किलोमीटर दूरी पर ही स्थित है। इस मेले में सिर्फ मध्य प्रदेश ही नहीं, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के लोगों की भी सहभागिता रहती है।

पूर्वजों के अनुसार यहां पर माताजी अपने साक्षात दर्शन कराती थी। कहते हैं कि विवाह के समय यहां पर बहनों को माताजी के द्वारा रकम दी जाती थी परंतु कुछ लोगों ने उसका दुरुपयोग किया तब से यह बंद हो चुका है। मान्यता है कि इस मंदिर में सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूर्ण होती है। विशेष कर पढ़ाई से लेकर नौकरी एवं राजनीति करने वाले लोगों के लिए यह माताजी विशेष कर लाभदायक है। हनुमान जयंती के के दिन आदिवासी अंचल में सामूहिक भोजन दाल पानिए घर के बाहर बनते हैं। इसके साथ घर के मुख्य द्वार पर आम और नीम की पत्तो की तोरण बांधी जाती हैं। इसके बाद ही घर के अंदर से गोबर निकाला जाता हैं तथा इसके बाद ही बाहर बना भोजन अंदर रखा जाता है। आज से किसान बंधु भी अपनी खेती की शुरुवात करते है। खेत में खाद डालना, खेत की सफाई, हल जोतना ये सभी आज से ही प्रारंभ किया जाता है।

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